Friday, June 4, 2010

मौसम थोड़ा कूल, पर धूल ही धूल

आंधी-तूफान का मौसम। हर तरह की आंधियां और तूफान! कुछ हुए फिस्स। कुछ ने किया। बहुत कुछ तितर-बितर। लैला का था बड़ा शोर। लबे साहिल तक। पहुंचते-पहुंचते पड़ा। जोश ठंडा। आया दम। बच गये हम। अब फेट का हल्ला। लेकिन बंगाल की खाड़ी में। ममतादी लायीं जो राजनीतिक तूफान। वह हैरतअंगेज! गर्मी का मौसम। लू के थपेड़ों के साथ। चली हिंसा की क्रूर हवाएं। उड़ा ले गयीं वे। यूपीए की सालगिरह की नर्म हवाएं। अब मौसम। अजब। कभी गर्मी। कभी आंधी, गजब। मौसम थोड़ा कूल। पर धूल ही धूल।

2 comments:

माधव said...

दिल्ली में तो धुल जा जबरदस्त असर है , सुबह उठा तो बाहर रखे कूलर पर धुल की एक मोटी चादर मिली , पर सवाल यह है की यह धुल आ कहा से रही है

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी said...

मौसम थोड़ा कूल। पर धूल ही धूल।

पर आप तो कूल ही कूल हो जी... बढ़िया है।